सैनिक-आध्यात्मिक गुरू देश के दो स्तंभ

८ अक्‍तूबर, २०१७ ५:२९ अपराह्न

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सैनिक-आध्यात्मिक गुरू देश के दो स्तंभ

Kerela, 08 October : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सैनिकों और आध्यात्मिक गुरूओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह वे दो स्तंभ हैं जिन पर देश की उम्मीदें टिकती हैं. कोविंद ने वल्लीक्कावू के पास स्थित माता अमृतानंदमयी मठ मुख्यालय में मठ की 100 करोड़ रूपये की पहलों की शुरूआत की. साथ ही विभिन्न धर्मों को समायोजित करने में केरल की सदियों पुरानी विरासत की भी प्रशंसा की. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आध्यात्मिक गुरू माता अमृतानंदमयी के 64वें जन्मदिवस समारोहों के संबंध में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे. बता दें कि माता अमृतानंदमयी को उनके श्रद्धालु ‘‘अम्मा’’ के नाम से जानते हैं.

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद नयी दिल्ली के बाहर उनकी पहली यात्रा जम्मू कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र के लेह नगर में सैनिकों से मुलाकात करने के लिए थी. उन्होंने कहा कि सैनिक अत्यंत मुश्किल परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘एक ओर हमारे सैनिकों की वीरता और दूसरी ओर हमारे आध्यात्मिक गुरूओं की करूणा, प्रेम और ज्ञान... यह दो स्तंभ हैं जिन पर हमारी उम्मीदें टिकती हैं.’’ कोविंद ने केरल की प्रशंसा एक ऐसे राज्य के तौर पर की जिसने ‘‘हमारे लोकाचार और संस्कृति की रक्षा के लिए काफी कुछ किया है.’’ उन्होंने कहा कि भारत में जो पहली मस्जिद बनी थी वह केरल में बनी थी. उन्होंने कहा कि उसका निर्माण अरब व्यापारियों द्वारा सातवीं शताब्दी में पैगंबर के जीवनकाल में ही किया गया था.

स्रोत: newswing.com

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