सुप्रीम कोर्ट का आदेश: आम्रपाली समूह की तमाम संपत्तियां जब्‍त कर ली जाएं

५ दिसंबर, २०१८ २:०० अपराह्न

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नई दिल्‍ली। आम्रपाली समूह को सुप्रीम कोर्ट ने तगड़ा झटका दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह की तमाम संपत्तियों को जब्त करने के आदेश दिए हैं.

कोर्ट ने आम्रपाली के 5 फाइव स्टार होटल, एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंजूमर गुड्स) कपंनी, कॉरपोरेट ऑफिस और मॉल जब्त करने का आदेश दिया है. आपको बता दें कि आम्रपाली के सैकडों हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स लटके हुए हैं और हजारों ग्राहकों के पैसे इस प्रॉजेक्ट में फंसे हुए हैं.सितंबर महीने में कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि हजारों लोगों को अब तक फ्लैट मुहैया नहीं कराया जाना गंभीर धोखाधड़ी है.

अनिल शर्मा ने मानी धोखाधड़ी की बातें- आम्रपाली बिल्डर्स ग्रुप के सीएमडी अनिल शर्मा ने माना है कि कंपनी ने फ्लैट देने के एवज में ली गई एडवांस रकम और मार्केट से उठाए गए पैसे का कुछ हिस्सा कारोबार के विस्तार में इस्तेमाल किया है.आम्रपाली ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ये रकम 2,996 करोड़ रुपए के आस-पास है. ग्रुप ने ये भी बताया है कि इस पैसे को बिजनेस के विस्तार के लिए इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इसके नतीजे उम्मीदों के मुताबिक नहीं आए और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स का काम भी अटक गया.

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा -क्यों ना उनके खिलाफ आपराधिक केस शुरू: आम्रपाली के सीएमडी और निदेशकों को नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों ना उनके खिलाफ आपराधिक केस शुरू किए जाएं. सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप से जुडे लोगों को कहा है कि होम बायर्स के पैसे जो भी मिले हैं वो सुप्रीम कोर्ट के खाते में सोमवार तक जमा कर दें. कोर्ट ने कहा कि जो ये नहीं करेगा उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2015 से 2018 तक के बीच के कागजात सोमवार तक फोरेंसिक ऑडिटर्स को दिए जाए. सुप्रीम कोर्ट ने NBCC से भी पूछा है कि किस तरह आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट कैसे पूरे होंगे. अगली सुनवाई 12 दिसंबर को होगी. दरअसल आम्रपाली के सीएमडी अनिल शर्मा की और से माना गया कि होम बॉयर्स के 2900 करोड रुपये दूसरी कंपनियों व अफसरों को बतौर गिफ्ट व अन्य तरीके से दिए गए.

सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये के बाद अनिल शर्मा ने जो जानकारी मुहैया कराई है, उससे पता चलता है कि आम्रपाली ग्रुप ने फ्लैट देने के नाम पर खरीदारों से जो रकम इकठ्ठा की थी, उसे कई अन्य कंपनियों के जरिए इस्तेमाल किया. कोर्ट में दाखिल आम्रपाली के हलफनामे के मुताबिक नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कंपनी के 170 से ज्यादा टावर हैं, जहां 46,000 से ज्यादा लोगों ने घर बुक कराए हैं. ग्रुप की अलग-अलग 15 कंपनियों ने इन्हीं के नाम पर फ्लैट खरीदारों से 11,573 करोड़ रुपए, जबकि मार्केट और एफडीआई से 4,040 करोड़ रुपए हासिल किए थे. इस रकम में से 10,300 करोड़ रुपए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर खर्च किए गए, जबकि करीब 3000 करोड़ रुपए की रकम बिजनेस विस्तार पर खर्च की गई थी. यहां आपको बता दें कि ये हिसाब-किताब साल 2015 तक का ही है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच के लिए नियुक्त किए गए फॉरेंसिक एडिटर ने शक जाहिर किया है कि आम्रपाली 200 कंपनियों के जरिए होम बायर्स के पैसे को अपने काम में इस्तेमाल कर रही थी. हालांकि आम्रपाली ने ऐसा सिर्फ 9 कंपनियों के संदर्भ में स्वीकार करते हुए इनकी लिस्ट सौंपी है. इस लिस्ट में स्मार्ट सिटी देव, सेंचुरियन पार्क, ड्रीम वैली, लेजर वैली, सिलिकन वैली और जोडियक देव का नाम शामिल है.

फॉरेंसिक एडिटर का काम कर रहे रवि भाटिया और पवन कुमार अग्रवाल के मुताबिक आम्रपाली ग्रुप फ्लैट खरीदारों से जो पैसा ले रहा था, उसे अपनी अन्य कंपनियों या रिश्तेदारों की कंपनियों में कंस्ट्रक्शन के काम से इतर भी इन्वेस्ट कर रहा था. इस दौरान कई शेल कंपनियों का भी पता चला है, जिनकी जांच की जा रही है. इनमें से एक कंपनी के नाम पर आम्रपाली ने 1040 करोड़ रुपए खरीदारों से लिए, लेकिन मकान बनाने की जगह 600 करोड़ रुपए दूसरी जगह इन्वेस्ट कर दिए.

सीएमडी अनिल शर्मा ने कोर्ट को दिए अपने एफिडेविट में माना है कि लोन के रूप में या फिर बिजनेस के विस्तार के लिए कुछ पैसे इन्वेस्ट किए गए थे, लेकिन उनकी रिकवरी होती रही है. इस तरह के सभी ट्रांजेक्शन बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स, सीएफओ और स्टेच्युटेरी ऑडिटर की जानकारी के बिना नहीं किए गए हैं. ग्रुप का दावा है कि शॉपिंग मॉल, पार्किंग, रिसॉर्ट, कंस्ट्रक्शन और अन्य कामों पर 5980 करोड़ रुपए खर्च किया गया है, जबकि 667 करोड़ रुपए की रकम कॉन्ट्रैक्टर्स को चुकानी बाकी है.

स्रोत: legendnews.in

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