साल पूरा होते-होते अपने भी करने लगे अब मोदी सरकार की आलोचना

२२ मई, २०१५ ८:४५ पूर्वाह्न

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साल पूरा होते-होते अपने भी करने लगे अब मोदी सरकार की आलोचना

नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी सरकार के एक साल पूरा होते-होते अब सरकार के अंदर से भी आलोचनाएं होनी शुरू हो गई है. गरीबों के कल्याण की स्कीमों के फंड में कटौती को लेकर पीएम मोदी के कैबिनेट के अंदर से ही विरोध के स्वर उठने शुरू हो गये हैं. मोदी ने भारत की कल्याणकारी स्कीमों को प्राथमिकता देने की परंपरा को तोड़ते हुए केंद्रीय सामाजिक कल्याण की स्कीमों और सब्सिडी पर खर्च होने वाले फंड में कटौती की और इसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कर दिया. सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर यह सोचकर निवेश किया कि इससे आर्थिक विकास की रफ्तार तेज होगी. सरकार का कहना है कि कल्याणकारी स्कीमों में जो कटौती हुई है उसकी भरपाई के लिए राज्य सरकारों को टैक्स रेवेन्यू में बड़ा हिस्सा दिया जायेगा.

उन्होंने लिखा, ‘मुझे लगता है कि इसके राजनीतिक परिणाम बहुत ही बुरे हो सकते हैं.’ यह चेतावनी कम से कम तीन गरीब राज्यों ने निजी तौर पर दी है. अपने पूर्णकालिक बजट में जिसे 7 मई को संसद ने मंजूरी दी मोदी ने एक स्कीम के फंड में कटौती करके आधा कर दिया है. इस स्कीम के तहत लाखों गरीब बच्चों को मुफ्त खाना उपलब्ध कराया जाता है. इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की एक योजना के फंड में बहुत ही भारी कटौती कर दी. गरीबी से त्रस्त राज्य ओडीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पीएम मोदी को 29 अप्रैल को लिखे अपने एक पत्र में विरोध जताया था. उन्होंने लिखा था कि मोदी सरकार की नई पॉलिसी के कारण ओडीशा पर करीब 3350 लाख डॉलर का बोझ पड़ गया है जिसका भार राज्य संभालने की स्थिति में नहीं है.

उन्होंने लिखा, ‘हमारे इस नुकसान की भरपाई उस 10 फीसदी टैक्स रेवेन्यू से नहीं होगी जिसका सरकार ने वादा किया है. इसका देश के कुछ अधिक संवेदनशील और पिछड़े क्षेत्रों पर बहुत ही गंभीर सामाजिक-आर्थिक परिणाम देखने को मिलेगा. स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने एक संसदीय कमिटी के समक्ष अपनी चिंता साझा की थी. उनलोगों ने संसदीय कमिटी से बताया था कि बजट का मुफ्त दवा और क्लिनिकों को मजबूत करने की योजना पर बहुत ही बुरा असर पड़ेगा. दूसरी ओर सरकार ने सड़कों और पुलों के लिए फंड को दोगुना कर दिया और शिक्षा के लिए जो फंड दिया जाता है, उससे भी यह अधिक है. बच्चों के लिए आहार और पानी उपलब्ध कराने की योजना कितनी अहम है उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत में गरीब लोगों की बहुत ही दयनीय स्थिति है. विश्व के हर दस कुपोषित बच्चों में से चार बच्चा भारत का होता है. यह आंकड़ा अफ्रीका के देशों से भी ज्यादा है. देश के अस्पताल ग्रामीण इलाकों के बच्चों से भरे हुये हैं जो घटिया सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण कुपोषण का शिकार हैं.

स्रोत: palpalindia.com

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