‘2 मि‍नट’ मैगी की साख पर सवाल, 1947 से पुराना है इति‍हास

३१ मई, २०१५ ११:४४ पूर्वाह्न

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‘2 मि‍नट’ मैगी की साख पर सवाल, 1947 से पुराना है इति‍हास

नई दि‍ल्‍ली. भारत के नूडल्‍स मार्केट पर राज करने वाली नेस्‍ले की मैगी वि‍वादों के घेरे में है. बच्‍चों से लेकर बुजुर्गों के दि‍ल-दि‍माग और जुबान पर अपनी खास जगह बनाने वाली मैगी में लेड की मात्रा सामान्‍य से ज्‍यादा होने का आरोप लगा है. अचानक सामने आए मामले से आज मैगी की ब्रांडिंग और साख संदेह के घेरे में है. अब कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पुरानी साख को वापस लाने की है. भारत में मैगी इतना बड़ा ब्रांड बन चुका है कि‍ इनके ब्रांड एबेंस्डर जैसे सुपर स्‍टार अमि‍ताभ बच्‍चन और माधुरी दीक्षि‍त भी इस वि‍वाद का हि‍स्‍सा बन गए है. आलम यह है कि‍ न केवल नेस्‍ले मुकदमे का सामना कर रही है बल्‍कि‍ सेलेब्रि‍टि‍ज के पास भी अदालत का नोटि‍स पहुंच गया है.

यूपी के खाद्य सुरक्षा प्राधि‍करण ने मैगी के 12 अलग-अलग सैंपल लेकर केंद्र सरकार की कोलकाता स्थित लैब में टेस्ट कराया गया था. मैगी में तय मात्रा से 7 गुना अधिक लेड की मात्रा पाए जाने का मामला है. मामला इतना बढ़ गया है कि‍ यूपी सरकार ने मैगी में मिले लेड (सीसा) की मात्रा सामान्य से अधिक पाए जाने के मामले में मुकदमा दर्ज कर दि‍या है. ऐसा क्‍या है मैगी में कि‍ वह नूडल्‍स मार्केट में इतने साल से राज कर रही है. क्‍यों दूसरी कंपनि‍यां आजतक मैगी का मुकाबला नहीं कर पाईं. क्‍या है मैगी का इति‍हास.

नोमूरा की एक रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, भारत के झटपट पकने वाले नूडल मार्केट में मैगी की बाजार हि‍स्‍सेदारी 70 फीसदी है. इसके बाद 11 फीसदी बाजार हिस्‍सेदारी के साथ नि‍सान फूड का टॉप रेमन, 4 फीसदी हि‍स्‍सेदारी हिंदुस्‍तान यूनि‍लि‍वर का नॉर सूपी नूडल की है. इसने अलावा, जीएसके कंज्‍यूमर का हॉर्लि‍क्‍स फूडल्‍स (3 फीसदी), कैपि‍टल फूड्स का स्‍मि‍थ एंड जोन्‍स (3 फीसदी), आईटीसी का सनफीस्‍ट येप्‍पी (फीसदी) का नंबर आता है.

नोमूरा की रि‍पोर्ट में कहा गया है कि‍ नेस्‍ले ने मैगी को उस वक्‍त पेश कि‍या था जब नूडल भारत में पॉपुलर नहीं था. बाजार में पहला खि‍लाड़ी होने की वजह से नेस्‍ले के मैगी को पूरा फायदा मि‍ला. इसके अलावा, मैगी को भारतीय अंदाज और भारत के लि‍ए पेश कि‍या गया. दूसरी कंपनि‍यां इस बाजार में काफी देर से आईं | तब तक मैगी हर घर में पहुंच चुकी थी.

मैगी एक इंटरनेशनल ब्रांड है जि‍से नेस्‍ले ने 1947 में खरीदा था. वास्‍तव में इसकी शुरुआत 1872 में जूलि‍यस मैगी ने की थी. उस वक्‍त यह ब्रांड मैगी नूडल्‍स, मैगी क्‍यूब और मैगी सॉस के लि‍ए प्रचलि‍त था. जूलि‍यस मैगी ने जर्मनी के सिंजेन शहर में मैगी जीएमबीएच नाम से कंपनी शुरू की जो आज भी मौजूद है. साल 1947 में इसके मालि‍काना हक और कॉर्पोरेट स्‍ट्रक्‍चर में बदलाव आए. अंत में मैगी का नेस्‍ले में मर्जर हो गया और उस कंपनी का नाम नेस्‍ले एलि‍मेनटाना रखा.

नेस्‍ले ने मैगी नूडल्‍स को 2 मि‍नट की टैबलाइन के साथ लॉन्‍च किया. मैगी उस वक्‍त आई जब तुरंत पकने वाले खाने का चलन भारत में नहीं था. 33 साल के बाद भी मैगी का इस मार्केट पर 70 फीसदी से ज्‍यादा का कब्‍जा है. अपने टीवी वि‍ज्ञापन में ब्रांड को ‘मैगी मॉम’ के तौर पर पॉपुलर कि‍या गया. वह अपने बच्‍चों का वैसा ही ध्‍यान रखती है जैसे पारंपरि‍क भारतीय मां करती हैं. लेकि‍न आधुनि‍क युग में कामकाजी महि‍लाओं के पास ज्‍यादा वक्‍त नहीं होता कि‍ वह खाना बनाने पर ज्‍यादा समय दे पाएं. ऐसे में 2 मि‍नट में पकने वाली मैगी ने कमाल कर दि‍या. इसे कथि‍त रूप से हेल्‍थी बताया गया. मैगी ने भारतीय बाजार के अनुरूप मसाले भी तैयार कि‍ए जि‍सकी वजह से इसे पंसद कि‍या गया.

आज भी मैगी बीते वक्‍त की याद दि‍लाते हुए नूडल्‍स मार्केट में सबसे आगे है. साल 2008 में मैगी की 25 सालगि‍रह पर नया वि‍ज्ञापन पेश कि‍या गया. इसका शीर्षक ‘मैं और मेरी मैगी’ रखा गया. इस कैंपेन में मैगी खाने वालों की व्‍यक्‍ति‍गत कहानि‍यों को भावनात्‍मक अंदाज में सुनाया गया. एक वि‍ज्ञापन में बच्‍चे ‘मैगी मैगी मैगी’ का राग अलापते हैं. आज छोटे बच्‍चे, कॉलेज के बच्‍चे और काम करने वाले लोग सभी इसका राग अलापते हैं.

नेस्‍ले पर वि‍कसि‍त देशों में अपने वि‍ज्ञापनों और मार्केटिंग नि‍यामकों का उल्‍लंघन करने और वि‍कासशील देशों में गलत दावों का आरोप लगा. उदाहरण के लि‍ए नेस्‍ले ने अपने नूडल प्रोडक्‍ट लेबल पर ‘वेजि‍टेरि‍यन’ होने का दांवा कि था जबकि‍ उनके प्रोडक्‍शन लाइन में कई प्रकार के जानवरों की चर्बी और जानवरों के तेल को मि‍लाया जाता था. इसके अलावा अक्‍टूबर 2008 में नेस्‍ले ने गलती से बांग्‍लादेश के लि‍ए वि‍ज्ञापन को ब्रि‍टि‍श टीवी पर एयर कर दि‍या.

मई 2015 में भारत में खाद्य सुरक्षा प्राधि‍करण ने मैगी के 12 अलग-अलग सैंपल लेकर केंद्र सरकार की कोलकाता स्थित लैब में टेस्ट कराया था. रिपोर्ट में मैगी के इन पैकेटों में लेड की मात्रा 17.2 पार्ट्स प्रति मिलियन (पीपीएम) पाई गई , यह तय सीमा से लगभग सात गुना ज्‍यादा है. इसके बाद खाद्य सुरक्षा और भारतीय मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश भर में मैगी के सैंपल्स की जांच के आदेश दिए है.

वि‍ज्ञापन और ब्रांड वैल्‍यूएशन जगत के लोगों का कहना है कि‍ नेस्‍ले इस वि‍वाद और आरोप को मौके के तौर पर देखते हुए प्रोडक्‍ट में सुधार कर सकती है. जहां तक मैगी की बि‍क्री पर कुछ समय तक दबाव दि‍खेगा लेकि‍न लंबी अवधि‍ में यह ब्रांड दोबारा बाजार अपनी ग्रोथ हासि‍ल कर लेगा.

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स्रोत: palpalindia.com

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