Film Review: जानिए कैसी है 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स'

२० मई, २०१५ ८:५६ अपराह्न

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Film Review: जानिए कैसी है 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स'

इस साल बॉक्स ऑफिस पर अभी तक कई तरह के प्रयोगों के साथ बहुतेरे फिल्मों ने दस्तक दी है. किसी ने कहानी छुपाई और रिलीज के बाद फिल्म औंधे मुंह गिर गई. लेकिन कुछ ऐसे भी फिल्ममेकर्स आए जिन्होंने दर्शकों को पहले ही बता दिया कि उनकी फिल्म में क्या-कुछ है. जाहिर तौर पर थीम की जानकारी होने पर दर्शक उसी मद्देनजर फिल्म देखने पहुंचे.

बेहतरीन स्क्रीनप्ले और सीधी, सरल लेकिन मिठास ली हुई कहानी के साथ हाल ही आई 'पीकू' ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया है. बाप-बेटी के रिश्तों पर आधारित इस फिल्म को जनता का खूब प्यार भी मिला, वहीं अब लेखक हिमांशु शर्मा और डायरेक्टर आनंद एल राय दर्शकों के लिए 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स' में सीक्वल का तड़का लेकर आए हैं. हालांकि फिल्म के प्रोमो पहले ही यह बता देते हैं कि ये 'पति पत्नी ओर वो' की कहानी पर आधारित है, लेकिन जाहिर तौर पर मंझे हुए कारीगरों के हाथों बनी इस फिल्म को परोसने का अंदाज लुभाने वाला है.

कहानी: पिछली फिल्म 'तनु वेड्स मनु' से आगे बढ़ती इस कहानी में तनु उर्फ तनूजा त्रिवेदी (कंगना रनोट) और NRI लंदन बेस्ड डॉक्टर मनु उर्फ मनोज शर्मा (आर माधवन) की शादी हो चुकी है. फिल्म के शुरुआती हिस्से में इस बात को बखूबी क्रेडिट्स के जरिए दर्शाया गया है. नई फिल्म शादी के चार साल बाद शुरू होती है. इसमें अब आम जीवन की तरह पति-पत्नी के बीच नोक-झोंक शुरू हो चुकी है. हालात बद से बदतर होते हैं और बात तलाक तक पहुंच जाती है.

तनु लंदन से वापस कानपुर अपने घर लौट आती है. जबकि मनु को भी उसका दोस्त पप्पी (दीपक डोबरियाल) किसी तरह मान-मनाकर लंदन से वापस कानपुर ले आता है. कहानी में आगे कुछ घटनाक्रम ऐसे होते हैं कि मनु को दिल्ली जाना पड़ता है और वहां उसकी मुलाकात हरियाणा के झज्जर जिले की रहने वाली एथलिट कुसुम उर्फ दत्तो (कंगना रनोट) से होती है. कुसुम को पहली नजर में देखते ही मनु को प्यार हो जाता है.

यानी कहानी में पति पत्नी के बीच अब 'वो' की एंट्री होती है. अब बात निकली है तो दूर तलक जाएगी. कहानी में कई मोड़ आते हैं. घटनाएं घटती हैं. तनु की मुलाकात अपने पुराने प्रेमी राजा अवस्थी (जिम्मी शेरगिल) से होती है. कभी तनु राजा के साथ घूमती नजर आती है तो कभी मनु और पप्पी का दत्तो और उसकी सहेली के साथ घूमना-फिरना होता है. अंत में तमाम उलझनों, विचारों और उधेड़बुन के बीच फिल्म एक बेहतर निर्णय के साथ खत्म हो जाती है.

स्क्रिप्ट और एक्टिंग: इस फिल्म की जान या यह कहें कि 'हीरो' इसकी स्क्रिप्ट है. हिमांशु शर्मा ने जिस तरह कहानी को पिरोया है वह काबिल-ए-तारीफ है. बात कानपुरिया लहजे की हो या सड़कों से लेकर गली-मुहल्लों की. हर सीन से लेकर हर किरदार की अपनी एक अलग छाप फिल्म में नजर आती है. कहानी दर्शक को अपनी सी लगती है. प्यार, विवाह, रिश्तों और उलझनों के बीच हंसी-ठहाकों का दौर भी चलता रहता है.

कंगना रनोट ने इस फिल्म में भी अभि‍नय कला के शीर्ष को छुआ है. वह आलोचकों को बताती हैं कि उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार यूं ही नहीं मिला है. तनूजा त्रिवेदी का लुक, दत्तो का रहन-सहन, उसके बोलने का लहजा. हर किसी में कंगना ने खुद को साबित किया है. दोनों किरदार एक-दूसरे से अलग हैं, लेकिन कंगना बॉलीवुड की 'क्वीन' हैं और उनका काम प्रशंसनीय और सराहनीय है. वह वाकई 'मोहल्ले की बैटमैन' हैं.

आर माधवन ने मनु शर्मा के रूप में एक पति और प्रेमी दोनों का किरदार बखूबी निभाया है. खास तौर से फिल्म के क्लाइमेक्स में माधवन ने गजब की अदाकारी की है. उनकी कॉमिक टाइमिंग और डायलॉग डिलिवरी हंसने पर मजबूर कर देती है. चेहरे पर गंभीरता के भाव के साथ उनके मुंह से 'मैं कोई संतरा हूं कि रस भर जाएगा' या 'पिछली बार भैया दूज पर सेक्स किया था' सुनना अच्छा लगता है.

दीपक डोबरियाल (पप्पी) पर्दे पर जब भी आते हैं दर्शक के चेहरे पर हंसी तैरने लगती है. जबकि पायल के किरदार में स्वरा भास्कर और राजा अवस्थी के रोल में जिम्मी शेरगिल ने कैरेक्टर के साथ न्याय किया है. जीशान अयूब भी बेहतरीन परफॉर्मर बनकर उभरे हैं.

संगीत पक्ष: फिल्म के गीत पहले ही चार्टबस्टर में जगर बना चुके हैं. 'स्वैगर', 'मूव ऑन', 'घनी बावरी' के साथ-साथ लगभग 2 घंटे की इस फिल्म में गीत बेवजब ठूसे गए नहीं लगते. सोनू निगम का गाए अलाप को आप बिना म्यूजिक के भी सुन सकते हैं.

क्यों देखें: कोई भी फिल्म असल में एक कहानी होती है, जिसे दर्शक लेखक और निर्देशक की आंखों से पर्दे पर देखते हैं. 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स' में लेखक हिमांशु शर्मा और डायरेक्टर आनंद एल राय ने कोई कमी नहीं छोड़ी है. 200 फीसदी मनोरंजन के साथ फिल्म में एक संदेश भी है. यह एक कंप्लीट फैमिली फिल्म है.

क्यों ना देखें: 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स' में ऐसा कुछ भी नहीं है कि इसे नहीं देखा जाए. यह दो घंटे में एक पैसा वसूल फिल्म है.

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स्रोत: aajtak.intoday.in

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