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राजनीति

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  • ऑफिसर्स एसोसिएशन के दखल से AAP नाराज, आशुतोष ने कहा कुंभकर्ण

    २२ मई, २०१५ ८:४५ पूर्वाह्न 9

    आशुतोष ने गुरुवार को ट्वीट करके कहा, आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन तब कुंभकरण की तरह सोता रहा जब मोदी सरकार ने होम सेक्रेटरी और फॉरेन सेक्रेटरी को हटा दिया था. दिल्ली में जारी संकट संवैधानिक मामला नहीं है. यह पोस्टिंग और ट्रांसफर में होने वाला करप्शन है.'' आशुतोष ने पूछा, ''मोदी सरकार आखिर क्यों पोस्टिंग और ट्रांसफर को अपने पास रखना चाहती है? क्या इसलिए कि कमाई वाले विभागों

  • नई दिल्ली,मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ,New Delhi, CPI, सांप्रदायिक रूप से ध्रुवीकृत करने की कोशिश

    २२ मई, २०१५ ८:४३ पूर्वाह्न 1

    बयान में कहा गया है, "आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की राजनीतिक शाखा के रूप में केंद्र में सत्तासीन दक्षिणपंथी सांप्रदायिक पार्टी, भाजपा के बारे में सभी आशंकाएं पिछले एक साल में सच साबित हुई हैं।" माकपा ने कहा, "भाजपा सरकार ने आरएसएस के एजेंडे को व्यवस्थित तरीके से लागू करने की कोशिश की है। इसने उच्च शिक्षा संस्थानों में आरएसएस के घोषित लोगों को घुसाया

  • "हम सिर्फ गैर मुसलमानों को नौकरी देते हैं"

    २२ मई, २०१५ ८:३१ पूर्वाह्न

    धर्म को कारण बता कर नौकरी के आवेदन को खारिज करने वाली एक कंपनी के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है. कंपनी का कहना है कि वह सिर्फ गैर मुसलामानों को ही नौकरी पर रखती है. मुंबई के रहने वाले जिशान खान ने हीरों की एक फर्म में नौकरी के लिए आवेदन भेजा. वे बताते हैं कि 15 मिनट के भीतर उन्हें अपने ईमेल का जवाब मिला, जिसमें लिखा था, "आपके आवेदन के लिए धन्यवाद. हमें आपको बताते

  • जातिवाद के आरोप में फंसा गे विज्ञापन

    २१ मई, २०१५ ९:५२ पूर्वाह्न 2

    मुंबई में जब एक समलैंगिक व्यक्ति की मां ने अखबार में अपने बेटे के लिए वर ढूंढने के लिए विज्ञापन दिया तो उसकी बढ़ चढ़ कर तारीफ तो हुई लेकिन फिर यह विज्ञापन जातिवाद के विवाद में फंस गया. पदमा अय्यर ने अपने बेटे हरीश के लिए जो विज्ञापन दिया उसे देश का पहला "गे मैट्रिमोनियल ऐड" कहा जा रहा है. इस कदम के लिए हरीश और उनकी मां की सोशल मीडिया पर जितनी सराहना हो रही है, उतनी ही विज्ञापन में जाति के जिक्र के लिए आलोचना

  • गे बेटे के लिए मां ने दिया इश्तिहार

    २१ मई, २०१५ ९:२५ पूर्वाह्न 2

    मुंबई की पदमा अय्यर ने अपने बेटे हरीश के लिए वधु नहीं, वर ढूंढने के लिए विज्ञापन दिया है. 57 वर्षीय अय्यर ने इस विज्ञापन में लिखा है, "तलाश है 25-40 साल के अच्छे नौकरीपेशा, जानवरों से प्यार करने वाले, शाकाहारी वर की, मेरे बेटे (36, 5'11") के लिए जो एनजीओ में काम करता है." विज्ञापन में ग्रूम यानि वर बड़े अक्षरों में लिखा है. किसी अन्य सामान्य विज्ञापन की तरह यहां भी जाति की बात की गयी, "कोई भी जाति चलेगी

  • क्यों होते हैं बलात्कार?

    २० मई, २०१५ २:०४ अपराह्न 2

    भारत में बलात्कार के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे. हर नया मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर देता है कि आखिर क्यों होते हैं बलात्कार. हमने लोगों से इसकी वजह जाननी चाही. जवाबों ने हमें हैरान कर दिया. हालांकि ऐसा नहीं कि सभी पुरुष महिलाओं के बारे में ऐसी सोच रखते हों. आदित्य कुमार ने विस्तार में लिखा, "इसका सीधा संबंध सोच से ही है जिसके कई कारण हैं, जैसे कि भड़काऊ

  • बलात्कार मामले में पुलिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची छात्रा

    २० मई, २०१५ १२:४१ अपराह्न 1

    हरयाणा की एक स्टूडेंट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है कि पुलिस उसके बलात्कार के आरोपियों को बचाने की कोशिश में लगी है. 21 साल की यह युवती हिसार की जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की छात्रा है. वह यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट प्रोग्राम के दूसरे साल में पढ़ रही है और उसका आरोप है कि यूनिवर्सिटी के तीन लड़कों ने उसके साथ बलात्कार किया. युवती ने अदालत से दरख्वास्त की है कि मामले

  • चुनाव के बाद ब्रिटेन की उलझन

    १६ मई, २०१५ ४:५० अपराह्न 2

    चुनाव जीतना अब कितना अर्थहीन होता जा रहा है, यह कोई हम भारतीयों से पूछे! हमने अपनी लोकसभा के लिए वोट देते वक्त क्या-क्या प्रतिमाएं नहीं तोड़ी थीं! राजनीति के स्वघोषित पंडितों के सारे अनुमान धरे रह गए थे तो इसलिए नहीं कि उनके गणित में कुछ गड़बड़ थी। सच तो यह है कि मतदाता जब वोट देने के नए प्रतिमान गढ़ता है तभी-के-तभी उसे पढ़ सकने का शास्त्र अभी तक बना नहीं है। इसलिए

  • इस आपदा के हिमालयी सबक

    १३ मई, २०१५ २:५२ पूर्वाह्न 2

    हम इन सभी कदमों की प्रशंसा करें। पर क्या हम इस कदम की प्रशंसा करें कि केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने पर्यावरण मंत्रालय द्वारा हिमालयी उत्तराखंड में जलविद्युत परियोजनाओं को दी ताजा मंजूरी को लेकर सवाल उठाया और किसी ने इसकी परवाह नहीं की। उमा भारती ने कहा कि इन परियोजनाओं के कारण गंगा का पारिस्थितिकीय प्रवाह सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाएगा। असलियत

  • जनतंत्र में पुलिस की भूमिका

    १२ मई, २०१५ ३:५१ पूर्वाह्न 2

    विडंबना यह कि हत्या के तीन दिन में ही दोषी गैंग की पहचान हो जाने के बावजूद उन्हें दो हफ्ते तक गिरफ्तार न करने वाले गोरे अफसर का पब्लिक इन्क्वायरी के समक्ष तर्क रहा कि वह इस बुनियादी आपराधिक कानूनी प्रावधान से ही अनभिज्ञ था कि पुख्ता शक की बिना पर पुलिस को संदिग्ध की गिरफ्तारी का भी अधिकार है। उसके इस अविश्वसनीय दावे की तुलना भारत में आंध्र प्रदेश डीजीपी